सभी 18 अध्याय
1. अर्जुन विषाद योग
47
2. सांख्य योग
72
3. कर्म योग
43
4. ज्ञान कर्म संन्यास योग
42
5. कर्म संन्यास योग
29
6. ध्यान योग (आत्मसंयम)
47
7. ज्ञान विज्ञान योग
30
8. अक्षर ब्रह्म योग
28
9. राजविद्या राजगुह्य योग
34
10. विभूति योग
42
11. विश्वरूप दर्शन योग
55
12. भक्ति योग
20
13. क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग
35
14. गुणत्रय विभाग योग
27
15. पुरुषोत्तम योग
20
16. दैवासुर सम्पद् विभाग योग
24
17. श्रद्धात्रय विभाग योग
28
18. मोक्ष संन्यास योग
78
अध्याय 2
72 कुल श्लोक
सांख्य योग
ज्ञान, आत्मा की अमरता और निष्काम कर्म
श्लोक चुनें (1 - 72):
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
dhyāyato viṣhayān puṁsaḥ saṅgas teṣhūpajāyate | saṅgāt sañjāyate kāmaḥ kāmāt krodho ’bhijāyate
सरल हिंदी अर्थ
विषयों का निरंतर ध्यान करने से मनुष्य का उनसे जुड़ाव हो जाता है। आसक्ति से इच्छा जन्म लेती है और इच्छा बाधित होने पर क्रोध भड़कता है।
आज के जीवन के लिए व्यावहारिक सीख
ओवरथिंकिंग और नकारात्मक विचारों में उलझना तनाव का मुख्य कारण है।
जिस विचार पर आप बार-बार ध्यान देंगे, वह आपकी शांति छीन लेगा।
अनावश्यक सोच को रोकें और तुरंत अपने आवश्यक काम पर ध्यान केंद्रित करें।
अपने मन और विचारों के स्वामी बनें, उनके दास बनकर जीवन न खोएं।