अध्याय 17 28 कुल श्लोक

Shraddhatraya Vibhaga Yoga

The Yoga of the Threefold Division of Faith

श्लोक 1 / 28 · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

karmaṇy-evādhikāras te mā phaleṣhu kadāchana | mā karma-phala-hetur bhūr mā te saṅgo ’stvakarmaṇi

सरल हिंदी अर्थ

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फलों पर कभी नहीं। इसलिए कर्म के फल की इच्छा से कर्म मत करो और न ही अकर्मण्यता में आसक्त होओ।

आज के जीवन के लिए व्यावहारिक सीख

परिणाम की व्यर्थ चिंता में अपना आज का दिन और मानसिक शांति न गंवाएं।
अपना 100% ध्यान और ऊर्जा सिर्फ अपनी वर्तमान मेहनत और प्रक्रिया पर लगाएं।
जब आप अपने कर्म में सर्वश्रेष्ठ होंगे, तो सफलता स्वयं आपके कदम चूमेगी।
भविष्य के भय को अलविदा कहें, वर्तमान में जिएं और आत्मविश्वास से आगे बढ़ें।